कैसे आॐ पास तुम्हारे

लाल हमारा नन्हा सा था 
पाएँ-पाएँ चलता था 
आ-आकर वह आँचल थामे 
जाने क्या-क्या कहता था 
मैं भी उसको गोदी लेकर 
जाने क्या-क्या सोचा करती 
समय बदला और साल बीत गए 
गया लाल परदेश कमाने 
अब तो सिर्फ पाती का भरोसा 
फ़ोन कभी आ जाता है 
साल महीने कैसे जाते 
पंख लगे हों मानो उनके 
बूढ़ी माता टेक दरवाज़े
आस लगाए बैठी है
कब आएगा लाल हमारा 
संग हमें ले जाएगा 
आती है एक छोटी पाती 
समय नहीं है पास हमारे 
ताऊ जी से डॉलर भेजा 
काम तुम्हारे आएगा 
आस न करना मेरी तुम तो 
समय नहीं दे पाऊंगा 
बहू तुम्हारी मैके जाती 
संग हमें भी लेकर जाती 
उसको छोड़ नहीं मैं पाता
लाल हमारा मुझे न छोड़े
अम्मा कहो तुम्हीं अब कैसे 
आऊं मैं अब पास तुम्हारे 
कैसे तुम्हें ले जाऊं संग में 
जगह नहीं है पास हमारे !!
                                       प्रतिभा प्रसाद |