हम हिन्दुस्तानी

कारगिल का युद्ध हो
या सन बासठ की लड़ाई 
मरते हैं सारे हिन्दुस्तानी भाई 
तब न होता कोई 
हिन्दू-मुस्लिम-सिख-इसाई
क्यों नहीं सीमाओं पर होते 
ऐसे सिपाही , भ्रष्ट नेता , बेईमान व्यापारी 
मुहल्ले का दादा 
चौक का गुण्डा
जो डरा धमकाकर 
माल खिलाकर 
युद्ध को 'फिक्स' कर लेते 
अपने देश के लिए 
अपने हुनर का कमाल दिखाते 
उनकी ज़मीन भी हड़प कर ले आते !
ऊपर से देवता अन्दर प्रपंच 
ऐसे हैं नेता टुच्चे सरपंच 
मदारी डुगडुगी बजाओ 
ऐसा नाच नचाओ 
सारों को हिन्दुस्तानी होने का पाठ पढ़ाओ
उन्हें समझाओ 
भ्रष्टता और बेईमानी से
छुटकारा दिलाओ 
भारत सोने की चिड़िया न सही
असली चिड़ियों का बसेरा तो बनाओ 
हम हैं हिन्दुस्तानी 
यह समझो और समझाओ |
                                             प्रतिभा प्रसाद |

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